क्या माली (माळी) हिंदू हैं??? कहाणी पढ़ने के लिए चित्र को छु ले

क्या माली हिंदू थे? सुमनमालाकारवत्थु कहानी | Mulnivasi Yodha

क्या माली (माली) हिंदू हैं

Sumanamālakāravatthu

research by || article by || written by Mulnivasi Yodha मूलनिवासी योध्दा

लेख का विवरण

नोट: यह लेख वैचारिक एवं ऐतिहासिक दृष्टिकोण पर आधारित है।

यह कहानी त्याग, समर्पण और शुद्ध विचारों का संदेश देती है।

और कहाणी बताती है की त्याग समर्पण का जन्म पवित्र भावना (मन)(विचार) से हो जाता है

एक माली रोज फूलों को इकट्ठा कर राजा को भेंट देता था और बदले में उसे मूल्य मिलता था।

उस माली का नाम सुमनमालाकरवत्थु था। उसकी जीविका का साधन सुंदर और कोमल फूल थे।

एक दिन जब फूलों को ले कर राजा के पास जा रहा था उसी वक्त उसकी नजर उन्ह भिक्षुयों के बीच पास पहुंची जो चारिका कर रहे थे उस बीच में एक शांती शुध्द वाणी और तेजस्वी मुख था वह बुध्द थे

वह माली बुध्द के शुध्द रुप देख वही रुक गया तथा बुध्द के वाणीसे उसके अंदर कोमलता का जन्म हुआ या उसने उस फूलों को बुध्द के लिए समर्पण करना यह भावना निर्माण हो गयी

लेकिन यह निर्णय खतरनाक था, क्योंकि राजा नाराज़ हो सकता था। परंतु माली का संकल्प दृढ़ था और उसके मन से भय समाप्त हो चुका था।

वजह यही निर्णय उसे राज्य से हद्दपार कर देता या राजा आपने सैनिकों से उसे खत्म करने का हुक्म देता लेकिन उस माली का निश्चय दृढ था उसकी भावना वृध्द हो गयी थी तथा उसका भय निर्वाण हो कर शुध्द विचारों का जन्म हुआ था

उस माली ( सुमनमलकरवत्थु ) बुध्द को फूल समर्पण कर घर गया

और आपनी पत्नी को सब वाक्या बता दिया तब उसकी पत्नी भय से पीडीत हो कर राजा के पास पहुंची और राजा को सभी बात बता कर बोली महाराज मैंने मेरे पती को छोड दिया है अब मेरा उनसे रिश्ता ना रहा कृपा कर के मुझे दंड ना दे तब राजा ने उसे जाने के लिए कहा

लेकिन राजा उस माली को बुलाकर उस को उपहारों से नवाजा

बुद्ध ने कहा — यदि आप शुद्ध विचारों से कर्म करते हैं, तो निश्चित आप को सुख प्राप्त होता है; और अशुद्ध विचारों से कर्म करने पर दुख मिलता है।

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